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पत्नी के खर्चों के बोझ तले इतना दबा हुआ हूं मैं

पत्नी के खर्चों के बोझ तले इतना दबा हुआ हूं मैं शाम हुए ना घर जाऊं दिल ये मेरा कहता है सारी कमाई दे देता हूं फिर भी नहीं चैन से रहता हूं

आके मेरी बाहों में अचानक लिपट गई

आके मेरी बाहों में अचानक लिपट गई बाहों में पाके उसको मदहोश हो गया बारिश हुई ऐसी के मेरी नींद खुल गई मैं बिस्तर उठा कर भागा और ख्वाबों को सोच कर मैं खामोश हो गया

तुम रख लो मेरे मोहब्बत को पैमानों पर

तुम रख लो मेरे मोहब्बत को पैमानों पर कितना प्यार करता हूं इसका अंदाजा हो जाएगा जिंदगी सवरने लगी है सपनों की तरह वह प्यार करते हैं मुझे आजकल अपनों की तरह

कुछ लोग खामोश रहकर

कुछ लोग खामोश रहकर बहुत कुछ बोल देते हैं हर राज आंखों से खोल देते है वह चाहती है उसकी जुल्फों में हर वक्त गुजारे एक क्षण कि जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाती है समझाता हूं मजबूरियां हैं सब्र करना ही होगा